Rivers in Himachal Pradesh

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rivers in himachal pradesh

भारतवर्ष में नदियों का स्थान केवल सिंचाई तक सीमित नहीं. यहाँ नदियाँ पूजी जाती है. जल ही जीवन है. और जल हमें नदियों से ही प्राप्त होता है. हिमाचल में 5 नदिया हैं (Five Rivers in Himachal Pradesh ). सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब, तथा यमुना. वैदिक काल में इन्हें’ शुतुद्रि, विपाशा, पुरुशानी, अस्किनी, तथा कालिंदी कहते थी.

Satluj River

वैदिक नाम:- सुतुद्री संस्कृत नाम:- शुतद्रु
लम्बाई:- 1448 कि. मी. हिमाचल में प्रवाह क्षेत्र:- 320 कि.मी.
उद्गम स्थल:- मानसरोवर झीलजल ग्रहण क्षेत्र:- 20000 वर्ग कि. मी.

नदी के किनारे बसे शहर:- कल्पा, रामपुर,तत्तापानी,बिलासपुर

प्रवेश स्थान:- सतलुज शिपकी दर्रे से हिमाचल में प्रवेश करती है. शिपकी दर्रा किन्नौर में हैं. यह भाखड़ा गावं से पंजाब में प्रवेश करती है. बस्पा नदी कल्पा में सतलुज में मिलती है. स्पीती नदी नागमिया में सतलुज में मिलती है.

सतलुज:- यह वेदों में ‘ सुतुद्री ‘ नाम से वर्णित है. सांस्कृतिक साहित्य में इसे  ‘ शुतद्रु ‘ कहा गया है. यह तिब्बत स्थित मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत के दक्षिण में राकसताल झील से निकलती है.

सतलुज शिपकी दर्रे के पास हिमाचल- प्रदेश में प्रवेश करती है. शिपकी से थोडा नीचे पहुंचने स्पीती नदी इसमे मिल हो जाती है. बिलासपुर के ‘ भाखड़ा गावं ‘ के पास यह हिमाचल कि सीमा को छोड़ कर पंजाब में प्रवेश करती है. भाखड़ा में एशिया का सबसे ऊँचा भाखड़ा-बांध बना है.

सहायक नदियाँ:- बस्पा, स्पीती नदी, भावा.

Byas River

वैदिक नाम:- आर्जिकियासंस्कृत नाम:- विपाशा
लम्बाई:- हिमाचल में प्रवाह क्षेत्र:- 256 कि.मी.
उद्गम स्थल:- ब्यास कुण्डजल ग्रहण क्षेत्र:- 1200 वर्ग कि. मी.

नदी के किनारे बसे शहर:- मंडी

प्रवेश स्थान :- यह पीरपंजाल पर्वत श्रृंखला से रोहतांग के समीप ब्यास-कुण्ड से निकलती है. मिरथल नामक स्थान से यह नदी पंजाब में प्रवेश करती है.

ब्यास नदी:- यह वेदों में इसको ‘ आर्जिकिया ‘ नाम से वर्णित है.संस्कृत में इसे  ‘ विपाशा ‘ नाम से जाना जाता है. ब्यास हिमाचल प्रदेश में 256 कि. मी. कि दुरी तय करती है. इसका जल ग्रहण क्षेत्र 1200 वर्ग कि. मी. है. ब्यास नदी बजौरा नामक स्थान पर मंडी जिले में प्रवेश करती है. यह संधोल में मंडी जिले को छोड़ कर कांगड़ा जिले में प्रवेश करती है. काँगड़ा जिले के इन्दौर और मिरथल के मध्य यह नदी पूर्व से पश्चिम कि ओर बहती है. मिरथल नामक स्थान से यह नदी पंजाब में प्रवेश करती है. फिरोजपुर के हरी पतन पर ब्यास सतलुज नदी में मिल जाती है.

सहायक नदियाँ

पावर्ती नदी:- यह मणिकर्ण के पास निकलकर शमशी (कुल्लू) ब्यास नदी में मिल जाती है, सहायक नदियों में यह नदी सबसे बड़ी नदी है. इसके नदी के किनारे मणिकर्ण और कसोल स्थित है.

उहल नदी:- यह नदी मंडी में ब्यास नदी के साथ मिलती है.

हारल नदी:- यह नदी भुंतर के पास ब्यास नदी में मिलती है.

तीर्थन नदी:- यह नदी लारजी के पास ब्यास नदी से मिलती है.

चक्की नदी:- जो कि पठानकोट के पास ब्यास नदी में मिलती है . इस नदी के किनारे नूरपुर स्थित है. बान गंगा, लूनी, पतलीकुहल, सैंज, और सुकेती ब्यास इसकी सहायक नदियां है.

Raavi River

वैदिक नाम:- पुरुशानी संस्कृत नाम:- इरावती
लम्बाई:- हिमाचल में प्रवाह क्षेत्र:- 158 कि.मी.
उद्गम स्थल:- जल ग्रहण क्षेत्र:- 5451 वर्ग कि. मी.

रावी के किनारे बसे शहर:- चम्बा

प्रवेश स्थान:- यह धौलाधार पर्वत श्रंखला के बड़ा भंगाल क्षेत्र के भादल और तांतगुरी नामक दो हिमखंडों के संयुक्त होने से गहरी खड्ड के रूप में निकलती है. यह पीर-पंजाल श्रंखला को को धौलाधार से अलग करती हुए पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है.

रावी नदी : इसका वैदिक नाम ‘ पुरुशानी ‘ है. संस्कृत में रावी को  ‘ इरावती ‘ कहा गया है. रावी को  भाषा में ‘ रौती ‘ भी कहते हैं. यह धौलाधार पर्वत श्रंखला के बड़ा भंगाल क्षेत्र के भादल और तांतगुरी नामक दो हिमखंडों के संयुक्त होने से गहरी खड्ड के रूप में निकलती है. चम्बा और रावी नदी एक दूसरे के पूरक है. चम्बा इसके दोनों तटों पर बसने वाला हिमाचल का प्रसिद्ध शहर है.

हिमाचल प्रदेश में 158 कि. मी. कि दुरी तय करती है. इसका जल-ग्रहण क्षेत्र 5451 वर्ग कि. मी. है, यह खेडी नामक स्थान पर चम्बा छोड़ कर जम्मू-कश्मीर में प्रवेश कर जाती है.

सहायक नदियां:- भादल, सियूल, बैरा, तांत, गिरी, चिड-चिंद नाला.

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Chenab River

वैदिक नाम:- असिकनी संस्कृत नाम:- चंद्रभागा
लम्बाई:- हिमाचल में प्रवाह क्षेत्र:- 122 कि.मी.
उद्गम स्थल:- जल ग्रहण क्षेत्र:- 7500 वर्ग कि. मी.

प्रवेश स्थान :-पांगी घाटी के भुजिंड नामक स्थान पर चम्बा जिले में प्रवेश करती है.

चिनाब नदी:- वेदों में इसे ‘ असिकनी ‘ नाम से वर्णित किया गया है. संस्कृत में इसका नाम ‘ चंद्रभागा है. जल घनत्व कि दृष्टी से यह हिमाचल कि सबसे बड़ी नदी है. यह नदी बारालाचा दर्रे कि विपरीत दिशाओं से निकलने वाली दो नदी धारओं-चन्द्रा और भागा के तांडी (लाहौल में) नामक स्थित पर मिलने से बनती है. भुजिंद नामक स्थान पर यह पांगी घाटी में प्रवेश करती है, हिमाचल प्रदेश यह 122 कि. मी. की दूरी तय करती है.

Yamuna River

वैदिक नाम:- कालिंदी संस्कृत नाम:-
लम्बाई:- हिमाचल में प्रवाह क्षेत्र:-
उद्गम स्थल:- यमुनोत्रीजल ग्रहण क्षेत्र:- 2320 वर्ग कि. मी.

यमुना नदी:- वेदों में इसका नाम ‘ कालिंदी ‘ के नाम से विख्यात है, यह उत्तराखंड के क्षेत्र कालिंद पर्वत से यमुनोत्री नामक स्थान से निकलती है, यमुना नदी हिमाचल में सिरमौर जिले के क्षेत्र खोदर माजरा नामक स्थान प्रवेश करती है, 22 किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद यह नदी सिरमौर जिले के एक क्षेत्र ‘ ताजेवाला नामक स्थान को छोड़ कर हरियाणा में प्रवेश कर जाती है. पुराणों में इसका सम्बंध ‘ सूर्या देव से जुड़ा हुआ है.

सहायक नदियां

टोंस:- यह नदी हर-कि-दुन घाटी से निकती है जो कि रूपीन-सुपीन से मिलकर बनी है. यह नदी कालसी (देहरादून घाटी ) पर यमुना नदी से मिलती है

गिरी:- यह नदी सिरमौर को दो बराबर भागो में बांटती है. गिरी नदी को खीरगंगा भी कहते है. गिरी नदी पोंटा में यमुना से मिलती है.

बट्टा:- यह नदी धरती रेंज (नाहन रिज के निचले ढलान) से निकलती है .

आपके सुझाव हमारे लिए उपयोगी हैं . अगर आपके पास हिमाचल प्रदेश की नदियों  Rivers in Himachal Pradesh के बारे में कोई जानकारी है तो Comment Section में शेयर करें.

2 COMMENTS

  1. आदरणीय वन्धू जी हिन्दी के शब्द कुछ अलग है और कुछ और जोड़ने की जरूरत है ।

    • श्रीमान् कृपया गलत शब्दों को सुधार के साथ बताने की कृपा करें हम जल्द ही उन्हें सही कर देंगे धन्यवाद

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