Kangra Earthquake

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Kangra earthquake

Himachal Pradesh के इतिहास में 4 अप्रैल 1905 का दिन कोई भी नहीं भूल पाता. इसी दिन के सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा में भूकंप ( Kangra Earthquake ) ने ऐसी तबाही मचाई थी कि अकेले हिमाचल प्रदेश के  Kangra जिले में 20,000 से अधिक लोगो की जान चली गयी थी और 53,000 जानवरों की मौत हो गयी थी. रिएक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 7.8 मापी गयी थी. ये भूकंप इतना तेज था की धर्मशाला के सारे की सारे मकान नष्ट हो गये थे. काँगड़ा से लेकर लाहौर तक आई इस त्रासदी में 28,000 से ज्यादा लोगों की जान चली गयी थी.

काँगड़ा जिला का प्रसिद्ध ‘Kangra Fort’ की अधिकतर दीवारें जमींदोज हो गयी थी और काँगड़ा के सी एम एस चर्च को भी भूकंप ने पूरी तरह से तबाह कर दिया था. इस भूकंप के कारण काँगड़ा की ज्यादातर ऐतिहासिक भवन नष्ट हो गये थे.भूकंप की जद में 4 लाख 16 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आया था. Kangra Earthquake से बैजनाथ शिव मंदिर को आंशिक नुकसान पंहुचा था. भूकंप से हिमाचल प्रदेश के कई जगहों पर भूस्खलन और चट्टानें गिर गयी थी. इस भूकंप से कुल्लू-मनाली से लेकर शिमला,सिरमौर तक अपनी विनाशलीला दिखाई थी.

भूकंप में कई अधिकारी भी मौत के ग्रास बन गए थे. बचे हुए लोगो में पुलिस अधीक्षक मिस्टर होमन भी शामिल थे. उन्होंने विशेष वाहक के साथ मदद के लिए एक संदेश तत्कालीन आलाधिकारिओं को भेजा था. उस समय काँगड़ा जालंधर डिवीज़न का भाग था. यहां हुई तबाही को लेकर तुरंत लाहौर से मदद भेजी गयी थी. काँगड़ा के भूतपूर्व जिलाधीश मिस्टर यंग हस्वैंड लाहौर में कमिश्नर पद पर थे,वह सहायता पार्टी के साथ आए. सहायता सामान और अधिकारिओं की एक विशेष रेलगाड़ी पठानकोट भेजी गई. इस समय बहुत से भारतीय और यूरोपीय लोगो ने संगठित होकर राहत कार्य किया। और मलबे के निचे दबे लोगो को जीवित बचाया गया और सड़कों का सुधार प्राथमिकता के आधार पर किया गया था. वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र भूकंप को लेकर काफी संवेदनशील है. अगर प्रकृति ने एक बार फिर ये तबाही बरपाई तो इस बार मरने वालो की संख्या हजारों में नही लाखो में होगी.

काँगड़ा भूकंप की याद में बना पार्क :-

अप्रैल 1905 के काँगड़ा भूकंप में मरे हुए लोगो को श्रद्धांजलि देने के लिए काँगड़ा में 7 अप्रैल 2006 को मंडल आयुक्त बृज कुमार अग्रवाल ने इस पार्क का उदघाटन नगर परिषद अध्यक्ष सुमन वर्मा व कार्यकारिणी अधिकारी पुरुषोत्तम चौधरी की मौजूदगी में किया गया था. इस पार्क को सांसद कृपाल परमार ने राशि प्रदान की थी. यह पार्क पुराना काँगड़ा रोड में पर स्थित है.

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