History of Himachal Pradesh

0
344
HISTORY OF HIMACHAL PRADESH

पुरातात्विक स्त्रोत

हिमाचल का इतिहास उतना ही पुराना है जितना मानव का इतिहास.हिमाचल के इतिहास ( History of Himachal Pradesh) की जानकारी इस से प्राप्त प्राचीन सिक्कों, शिलालेखों, साहित्यों इत्यादि से प्राप्त होती हैं.

सिक्के:- हिमाचल में त्रिगर्त, औदुम्बर, कुलुटा और कुनिंद राज वंशों के सिक्के प्राप्त हुए हैं.ये सिक्के भूरी सिंह म्युजियम तथा राज्य संग्रहालय शिमला में रखे गए हैं. इन में से 12 सिक्के अर्की से प्राप्त हुए हैं.अपोलोडोट्स के 21 सिक्के हमीरपुर के टप्पामेवा गावं से प्राप्त हुए है.कुषाण और यूनानों की मुद्राएँ भी हिमाचल से प्राप्त हुई हैं.

शिलालेख:- हिमाचल के इतिहास की जानकारी शिलालेखों तथा अभिलेखों से भी प्राप्त होती है.कांगड़ा के पठियार और कनिहार में अभिलेख प्राप्त हुए हैं. मंडी के सलोणु में शिलालेख प्राप्त हुए हैं.चम्बा से 36 अभिलेख प्राप्त हुए हैं.ये शारदा और टांकरी लिपियों में लिखे हुए हैं. ये सभी अभिलेख भूरी सिंह म्युजियम चम्बा में रखे गए हैं.जौनसार बावर में अशोक के शिलालेख है.जुब्बर में हाटकोटी के समीप सूनपुर की गुफा का शिलालेख प्राप्त हुआ है.

मूर्तियों पर उकेरे गए पुरालेखों में सबसे पुराना 7वीं शताब्दी का भरमौर की लखनादेवी की मूर्ति का है.निरमंड में ताम्रपत्र पर समुद्र्सेन का 7वीं शताब्दी का पुरालेख प्राप्त किया गया है.

साहित्य:- रामायण, महाभारत और ऋग्वेद में हिमालय में निवास करने वाली जातियों का वर्णन मिलता है.तारीख-ए-फिरोजशाही और तारीख-ए-फरिस्ता में नागरकोट हमले की जानकारी है.तुजुक-ए-जहाँगीरी में जहाँगीर के कांगड़ा आक्रमण की जानकारी है. तुजुक-ए-तैमूरी से तैमुर लंग के शिवालिक पर आक्रमण की जानकारी प्राप्त होती है.

Aniciant History of Himachal Pradesh

मारकंडा में पाए गए औज़ार 40,000 वर्ष पुराने हैं.कोल (आज के कोली), हाली,डोम, चनाल हिमाचल के सब से प्राचीन निवासी हैं. ऋग्वेद में हिमाचल के निवासियों को दस्यु, निषाद तथा दशास कहा गया है.

शाम्भर और दिवोदास का युद्ध

दस्यु राजा शाम्भर के पास 100 किले थे. दस्यु राजा शाम्भर और आर्यों के राजा दिवोदास के मध्य 40 वर्षों तक युद्ध हुआ. इस युद्ध में भारद्वाज ऋषि ने दिवोदास के सलाहकार की भूमिका निभाई.अंततः दिवोदास विजयी हुआ.दिवोदास ने उद्ब्रज नामक स्थान में शाम्भर को मार दिया.

सुदास और 10 राजाओ का युद्ध

एक अन्य महत्वपूर्ण घटना दाशराग्य युद्ध था.इसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है. यह दिवोदास के पुत्र सुदास तथा 10 आर्य तथा अनार्य राजाओं के मध्य हुआ था.सुदास की सेनाओं का नेत्रित्व ऋषि विशिष्ट ने किया था. 10 आर्य तथा अनार्य राजाओ की सेना का नेत्रित्व ऋषि विश्वामित्र ने किया.इस युद्ध में सुदास की विजय हुई.

किरात

हिमाचल में एक दूसरी जाती का भी उल्लेख मिलता है.इन्हें भोट या किरात के नाम से जाना जाता हैं. महाभारत में भी इनका वर्णन है.महाभारत में इन्हें हिमालय का निवासी बताया गया है.खशों के बारे में मनुस्मृति,महाभारत तथा पुराणों में भी लिखा गया है.

आर्य और खस

हिमाचल मेंतीसरी जिस प्राचीन जाती का वर्णन है वो हैं आर्य या खस. आर्य खुद को क्षत्रिय कहते थे. कहा जाता है क्षत्रिय राजा सहस्त्रार्जुन ने जमदग्नि ऋषि का वध कर के उनकी कामधेनु गाय छीन ली थी. जमदग्नि ऋषि परशुराम के पिता थे.जब परशुराम को ये पता चला उन्होंने सहस्त्रार्जुन का वध कर दिया.

चार जनपद

औदुम्बर :- ये ऋषि विश्वामित्र के वंशज थे.इनके सिक्कों में विश्वामित्र के चित्र पाए गये हैं. शिव इनके आराध्य थे. पाiणिनी ने अपनी किताब अष्टध्यायी में इनका उल्लेख किया है. ज्वालामुखी, पठानकोट तथा होशियारपुर में इनके सिक्के मिले हैं.गद्दी जाती के लोगों को इंसा वंशज माना जाता है.

त्रिगर्त:- त्रिगर्त के संस्थापक सुशर्म चन्द्र थे. सुशर्म चन्द्र ने महाभारत में कौरवों की तरफ से भाग लिया था.रावी, सतलुज और ब्यास के बीच के क्षेत्र को त्रिगर्त कहा जाता था.

कुल्लूत:- कुल्लूत की प्राचीन राजधानी नग्गर थी.कुल्लूत रियासत की स्थापना विहंगमणि ने की थी.

कुलिंद:- अर्जुन जो पांच पांडवों में से एक थे ने कुलिंद पर विजय प्राप्त की थी. कुलिंदों के पहाड़ों में रहने का प्रमाण विष्णु पुराण से मिलता है.सगूह कुलिंद की राजधानी थी.महाभारत में कुलिंद कौरवों की तरफ से लड़े थे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here