Himachal Pradesh Railway

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himachal pradesh railway
himachal pradesh railway

भारतीय रेल एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. भारत में सबसे पहले मुंबई से ठाणे के बीच रेल गाड़ी 16 अप्रैल 1853 में चली. इस में इंजन सहित कुल 14 डिब्बे थे. Himachal Pradesh Railway उत्तर रेलवे के अंतर्गत आता है.

Railway Routes of Himachal Pradesh

हिमाचल प्रदेश में मुख्यत: 4 रेलवे मार्ग है. 

  1. कालका-शिमला नैरोगेज मार्ग
  2. पठानकोट- जोगिन्द्र नगर नैरोगेज
  3. नंगल-ऊना-चरुडू ब्राडगेज     
  4. भानुपली-बिलासपुर- बेरी ब्राडगेज रेल मार्ग

Kalka – Shimla

कालका-शिमला नैरोगेज रेल मार्ग : सर्वप्रथम इस रेल लाइन का विचार 1847 ई० में दिल्ली गजट में प्रकाशित हुआ था.

1896 में ब्रिटिश शासन कि ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को कालका से जोड़ने के लिए दिल्ली अंबाला कम्पनी को इस रेल मार्ग के निर्माण करने कि जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

इस रेल लाइन का उद्घाटन 9 नवम्बर 1906 ई० को लार्ड कर्जन ने किया था. लाला राम नारायण इसमें सफ़र करने वाले प्रथम अधिकारी थे.

1906 में पहली बार यह रेल लाइन कालका से शिमला पहुची थी. कालका से शिमला के बीच आने वाले मार्ग में शुरू में 107 सुरंगे थी, जो कि 1930 ई० में पुनाकन के पश्चात् 103 रह गई.

आज के समय कि बात कि जाए तो इसकी संख्या 102 है. इस रेलमार्ग में 869 पुल और 919 मोड़ हैं.

Kalka to Shimla

समुद्रतल से इसकी ऊँचाई लगभग 1560 मी. है. 1143 मी. कि ऊँचाई पर बड़ोग सुरंग इसकी सबसे ऊँचाई पर स्थित सुरंग है. जब बड़ोग सुरंग कि खुदाई चल रही थी तो अंग्रेज अभियंता कैप्टन बड़ोग (जिनके नाम पर इस सुरंग का नाम रखा गया है) को इस सुरंग का दूसरा छोर नहीं मिल पा रहा था, जिसके कारण उसे 1 रुपये का जुर्माना भरना पढ़ा था. उसके कुछ दिन बाद उनसे इस शर्मिंदगी के कारण अपने आप और अपने कुते को गोली मार कर आत्महत्या कर ली. उसकी आत्महत्या के बाद चैल (जिला सोलन ) के बाबा भलकू राम ने अपनी अलौकिक शक्तियों कि सहायता से छड़ी के साथ मार्ग का सर्वेक्षण किया था . जिसके कारण अंग्रेजो को मार्ग का दूसरा छोर ढूंढने में मदद मिली थी.

इस रेलगाड़ी में लगभग 200 यात्री ले जाने कि क्षमता वाले 7 डब्बे है.

7 जुलाई , 2008 को इस रेल लाइन को UNESCO कि विश्व धरोहर सूचि में शामिल किया गया.   

इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है, क्यूंकि यह रेल लाइन कालका में समुद्रतल से 640 मी. कि ऊँचाई पर चलते हुए शिमला में 2130 मी. की ऊँचाई पहुँच जाती है. इसे Kalka Shimla Toy Train के नाम से भी जाना जाता है.

Kalka to Shimla Distance

कालका से शिमला रेलवे ट्रैक की दूरी 96 कि.मी. है. ट्रेन में कालका से शिमला लगभग 5 से 7 घंटे में पहुंचा जा सकता है.

Pathankot – Joginder Nagar

पठानकोट-जोगिन्द्र नगर नैरोगेज रेलमार्ग :- इस रेल लाइन का निर्माण 1926 ई० में शुरू हुआ और 1 अप्रैल 1929 ई० को इसको यातायात के लिए खोल दिया गया

इस रेल लाइन पर 993 पुल है और 2 सुरंगे है गज खड्ड पर बना गज पुल भारत में छोटी रेल लाइन का सबसे बड़ा पुल है.

इस रेल लाइन का मुख्यतः बनाने का लक्ष्य जिला मंडी के जोगिन्द्र नगर में स्थित शानन बिजली घर तक कचा माल ले जाने के लिए तैयार किया गया था.

1942 में इस रेल लाइन को नगरोटा – जोगिन्द्र नगर वाला भाग बंद कर दिया गया था, जिसे 15 अप्रैल 1954 को यातायात के लिए खोल दिया गया .

Nangal – Una

3. नंगल-ऊना-चरुडू ब्राडगेज :-  11 जनवरी 1991 का तत्कालीन रेलमंत्री जनेश्वर मिश्रा ने इस रेल लाइन का उद्घाटन किया था (14 कि. मी. नगंल –ऊना के बीच)

Bhanupalli – Bilaspur Railway Line

4. भानुपली-बिलासपुर- बेरी ब्राडगेज रेल मार्ग :- वर्तमान में यह हिमाचल प्रदेश कि एकमात्र कार्यरत   ब्राडगेज है. इस रेल लाइन का शुरुआत सर्वेक्षण 1985 में प्रारंभ किया गया था.

Railway Map of Himachal Pradesh

Railway Map of Himachal Pradesh
Railway Map of Himachal Pradesh

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