Formation of Himachal Pradesh

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formation of himachal pradesh

15 अप्रैल 1948 को एक लम्बी राजनीतिक लड़ाई के बाद 26 शिमला हिल्स स्टेट्स और पंजाब की 4 पहाड़ी रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश का निर्माण (Formation of Himachal Pradesh) हुआ तथा इसे केंद्र-शासित मुख्य आयुक्त क्षेत्र ( Commissioner Provence) का दर्जा दिया गया. श्री एन. सी मेहता प्रदेश के प्रथम मुख्या-आयुक्त (Chief Commissioner) थे. श्री ई. पी. मून प्रथम उप-मुख्यआयुक्त थे. हिमाचल प्रदेश के गठन के समय इसमें चार जिले – चम्बा , महासू, मंडी और सिरमौर थे. जिनका कुल क्षेत्रफल 27,018 वर्ग कि.मी. और जनसंख्या 9,35,000 थी. हिमाचल प्रदेश 1948 ई. से 1951 ई. तक मुख्य-आयुक्त क्षेत्र रहा.यहाँ तीन मुख्य-आयुक्त बने

  • एन. सी. मेहता (प्रथम)
  • ई. पी. मून ( द्वितीय जो कि प्रथम उप-मुख्याआयुक्त रह चुके है )
  • भगवान सहाय ( तृतीय )

‘ग’ श्रेणी का राज्य

Formation of Himachal Pradesh as C-Type State भारतीय संसद ने 1951 ई. में ‘ग’ श्रेणी के राज्यों का अधिनियम पारित किया .इस अधिनियम के अंतर्गत देश के सभी चीफ कमिश्नर प्रान्तों को ग श्रेणी के राज्यों में बदल दिया गया. फलस्वरूप सितम्बर 1951 ई. में हिमाचल प्रदेश को ‘ग’ श्रेणी का राज्य बनाया गया . अब मुख्या-आयुक्त के स्थान पर उप-राज्यपाल नियुक्त किया गया है. 1 मार्च 1952 ई. में मेजर जनरल हिम्मत सिंह को हिमाचल प्रदेश का प्रथम उप-राज्यपाल (lieutenant governor) नियुक्त किया गया.

प्रथम आमचुनाव

नवम्बर, 1951 ई. में 36 सदसीय विधानसभा के लिए प्रथम बार आमचुनाव हुए. कांग्रेस पार्टी ने 24 सीटें जीत कर बहुमत प्राप्त किया. एस. सी. एफ. (S.C.F) को एक स्थान पर विजय मिली. के.एम.पी.पी. (K.M.P.P.) कामगार, मजदूर पीपल्स पार्टी को 3 स्थान मिले. 8 स्थानों पर निर्दलीय उमीदवार विजयी हुए. 24 मार्च , 1952 ई. को डॉ. यशवंत सिंह परमार ने हिमाचल प्रदेश क प्रथम मुख्यमन्त्री के रूप में शपथ ली.

बिलासपुर का हिमाचल में विलय

1 जुलाई 1954 ई. को ‘ग’ श्रेणी का राज्य ‘बिलासपुर ‘ का हिमाचल प्रदेश में विलय हुआ.बिलासपुर हिमाचल प्रदेश का 5वां राज्य बना. इससे हिमाचल प्रदेश का क्षेत्रफल 28,185 वर्ग कि. मी. हो गया. प्रदेश में विधानसभा के सदस्यों कि संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गयी.

केंद्र शासित राज्य का दर्जा

29 दिसम्बर 1953 ई. को justice फाजिल अली कि अध्यक्षता में पुनर्गठन आयोग किय गया . डॉ. के एम. पाणीकर और यच. एन. कुंजरु आयोग के अन्य सदस्य थे. इस आयोग ने 2 के मुकाबले 1 मत से हिमाचल प्रदेश को पंजाब में शामिल करने कि सिफारिश कर दी. परन्तु आयोग के अध्यक्ष फाजिल अली ने हिमाचल प्रदेश को केंद्र-शासित राज्य बनाने का विचार प्रकट किया . अंतिम में डॉ. यशवंत सिंह परमार के प्रयासों के कारण हिमाचल प्रदेश को 1नवम्बर 1956 ई. को केंद्र-शासित राज्य का दर्जा दिया गया .

श्री बजरंग बहादुर को केंद्र- शासित हिमाचल प्रदेश का प्रथम उप-राज्यपाल नियुक्त किया गया . 1 नवम्बर 1956 से 25 जनवरी 1971 ई. तक हिमाचल प्रदेश केंद्र-शासित राज्य के रूप में रहा .

दिसम्बर 1956 ई. में विधानसभा को भंग करके 41 सदसीय क्षेत्रीय परिषद् का प्रावधान किया गया. मई-जून 1957 ई. मियन क्षेत्रीय परिषद् के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी को बहुमत प्राप्त मिला. मंडी के ठाकुर कर्म सिंह को क्षेत्रीय परिषद् का अध्यक्ष चुना गया.

1 मई 1960 ई. को महासु जिले कि चिन्नी तहसील को किन्नौर के नाम से हिमाचल प्रदेश का छठा जिला बनाया गया. केंद्र-शासित राज्य अधिनियम , 1963 के अंतरगर्त हि.प्र. क्षेत्रीय परिषद् को विधानसभा में परिवर्तित किया गया. विधानसभा की सदस्य संख्या 4३ निश्चित कि गई. जिससे 41 निर्वाचित सदस्य एवं 2 मनोनीत सदस्य शामिल थे. 1 जुलाई 1963 ई. को डॉ. यशवंत सिंह परमार हिमाचल प्रदेश के दूसरी बार मुख्यामंत्र्ती बने .

नवनिर्वाचित विधानसभा का प्रथम सत्र अक्टूबर 1963 को हुआ था.

काँगड़ा, कुल्लू, लाहौल-स्पीती और शिमला का विलय

1 नवम्बर 1966 ई. को पंजाब पुनर्गठन के पश्चात् चार नए जिले – काँगड़ा, कुल्लू, लाहौल-स्पीती और शिमला अम्बाला जिले का नालागढ़ क्षेत्र; होशियारपुर जिले कि उन तहसील का कुछ क्षेत्र; गुरदासपुर जिले के डलहौजी और बकलोल क्षत्रो का हिमाचल प्रदेश में विलय हुआ . इससे हिमाचल प्रदेश का कुल क्षेत्रफल 96% कि वृद्धि से 55,673 वर्ग कि.मी. हो गया. प्रदेश में जिलों कि संख्या 6से बढकर 10 हो गई.

1966 ई. में शिमला हि. प्र. कि राजधानी बनी. 1967 ई. में विधानसभा चुनावो में कांग्रेस पार्टी ने 63 में से 37 सेटे जीत कर बहुमत प्राप्त किया. डॉ. यशवंत सिंह परमार हिमाचल प्रदेश के तीसरी बार मुख्यमन्त्री बने.

24 जनवरी 1968 ई. को हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने हि. प्र. को पूर्ण राज्य का दर्जा देने कि मांग को एकता से पारित कर दिया. इससे संबन्धित विधेयक भारतीय संसद में 31 जुलाई 1970 ई. को पेश किया गया.

संसद ने हि. प्र. को पूर्ण राज्य बनाने का विधेयक 18 दिसम्बर 1970 ई. को पारित किया गया.

पूर्ण राज्य का दर्जा

25 जनवरी 1971 ई. को भारत कि पहली महिला प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने रिज(गिरिजा मैदान) पर हिमाचल प्रदेश को देश का 18वां पूर्ण राज्य घोषणा कि. क्षेत्रफल कि दृष्टि से देश 14वां राज्य बना. श्री एस. चक्रवर्ती को हि. प्र. का प्रथम राज्यपाल नियुक्त किया गया.

1 सितम्बर 1972 ई. को जिलों का पुनर्गठन किया गया. काँगड़ा जिला से हमीरपुर और उना जिले बनाए गए जबकि शिमला और महासु जिलों को पुनर्गठित क्र शिमला और सोलन जिला बनाया गया. इससे जिलों कि संख्या बढ़कर 10 से 12 हो गए -चम्बा, हमीपुर, मंडी, काँगड़ा, कुल्लू, किन्नौर, बिलासपुर, उना, लाहौल-स्पीती, सोलन, शिमला, सिरमौर.

1971 -1972 ई. में पूर्ण-सीमांकन के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीटों कि संख्या 63 से बढकर 68 हो गई.

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